03-Nov-2008

कुछ मेरी भी सुनिए---

साहित्य अध्यन में रूचि तो दसवीं से ही जागृत हुई परन्तु उनकी गहराइयों को समझने व
अंगीकार करने की समझ तो ग्यारवीं उत्तीरण करने के तदुपरांत ही आई वैसे अब तक मैंने कई साहित्यकारों को ढेरों उपन्यास, नाटक व्यंग, कहानियाँ, लेख आदि पढ़ी एवं अकेले में उनपर मनन भी किया, परन्तु मुझपर विशेष प्रभाव कलम के सिपाही मुंशी प्रेमचंद के द्वारा लिखित उपन्यास एवं कहानियों ने ही डाली मैं अपने लब्जों में बयां नही कर सकता की दिल की किन गहराईयों से होती हुई ये रचनाएँ अब- तक मेरे जीवन में गहरी पैठ बना चुकी है हिन्दी साहित्य कभी भी मेरी विषय वस्तु नही रही परन्तु बचपन से ही इससे इतना लगाव हो गया है की किताबों के बिना जीवन की लेश मात्र भी कल्पना नही कर सकता, अब दिल में कहीं ये बात गहरी जख्म देती है की इसे मैंने अपने विषय के रूप में क्यों नही चुना....

मेरी यह ब्लॉग मेरे मित्रो और मेरी छोटी बहन कामना को समर्पित है निजी और पेशेवर जिंदगी की व्‍यस्‍तताएं उस तरह का सुकून नहीं दे पा रही हैं जिनमें एक एक लम्‍हे को याद करके उन्हें डायरी पर उतारा जा सके । एक छोटी सी कोशिश कर रहा हूँ अपनी और कामना के शब्दों से आपको रूबरू कराने की हालाकि मैं खुद को एक अच्छा लेखक तो नहीं कह सकता परन्तु कमाना का लेखन अद्भुत है. काव्य की सरिता कल कल करती उसकी लेखनी से जब बहती है तो पढने वाले उसके साथ बह कर आनंद की अतल गहराईयों में डूब जाते हैं आज के इस आपाधापी भरे दौर में जब इंसान पत्थर सा संज्ञा शून्य हो चला है उसमें अपनी कविताओं से संवेदनाएं जगाना किसी भागीरथी प्रयास से कम नहीं है किन्तु मैं यह कोशिश जरुर करूँगा की आपको कुछ अच्छी कविताएं और लेख पढने को मिले..

2 comments:

tejnarain said...

hi......
i think ur
nice...
poem composer..
good.....
kuch apne deoria k baare me v likho

tejnarain said...

hi....