30-Aug-2009

ढूंढने निकला था सबको और ख़ुद को खो दिया
ढूँढ ले तू जान ले तू क्या तेरा अस्तित्व है.....
देख तुने पा लिया है, और क्या है खो दिया
पूछ ले तू आप से ही जा रहा तू किस डगर है ....
ढूंढने निकला था सबको और ख़ुद को खो दिया...

कौन तेरे साथ है और कौन तेरे बाद है
दूर इतना दूर कैसे , साथ हैं अभिमान था
पत्थर्रों के किस शहर में बस गया तेरा मन है...
ढूंढने निकला था सबको और ख़ुद को खो दिया...

गर्व था, सम्मान था तू किसी का जान था
स्वाभिमानी, दूरदर्शी, प्रेम का प्रतीक था
था समझ ना पाया तू या ये तेरा भ्रमजाल था
ढूंढने निकला था सबको और ख़ुद को खो दिया....

तू है क्या, तू है कहाँ,
बादलों
के किस जहाँ में है तेरा ये आशियाँ
शून्य है तू या समंदर कौन ये बतलायेगा
ढूंढने निकला था सबको और ख़ुद को खो दिया...







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