04-Sep-2009

कामना का कोना..

कामना (मेरी छोटी बहन और एक उभरती हुयी लेखिका) जिसके लेखनी का जिक्र मैंने अपने ब्लॉग को शुरु करते समय किया थाएक अरसे से सोच रहा था की उसकी रचनाओं को जो उसने मेरे कहते ही तुंरत मुझे भेज दिया था को अपने ब्लॉग पर प्रकाशित कर दूँ, किंतु आज तक मैंने अपने ब्लॉग पर उसके एक भी रचना को जगह नही दी वजह चाहे जो भी रहा हो समय का आभाव या आलस्य लेकिन आज इन सब बातों को दरकिनार करते हुए मैं कामना को एक कोना दे रहा हूँ जिसमे उसकी लिखी कविताओं को आप पढ़ सकेंगे और साथ ही साथ उसकी विवेचना करके उनपर अपने विचार जाहिर कर सकेंगे ताकि उसे आगे प्रोत्साहन के साथ-साथ अपन लेखनी में सुधार का भी अवसर मिलेआज कामना के कोना का आरम्भ उसकी लिखी किस कविता से करूँ इसी उहा-पोह में मैंने काफ़ी समय व्यतीत कर दिया और अंततः अपने भइया यानी की मेरे ही ऊपर लिखी एक कविता को मैंने चुन लिया तो लीजिये करते हैं आगाज कामना के कोने का ---- "अम्बरीष"









मेरे भईया

कितने प्यारे, कितने अच्छे
कितने भोले, कितने सच्चे
होते हैं ये, भाई-बहन के रिश्ते
मेरे भईया, प्यारे भईया
सबसे हैं वो न्यारे भइया
कभी हँसाते, कभी रुलाते
मार-पीट भी खूब जामते
छक कर हम मस्ती भी करते
मौका देख हमे डराते
कभी-कभी धमकाते भी
पर, कहाँ कम मैं भी हूँ
चुकू ना मौका कोई
धौंस जमाती, हक जताती
अपनी मनमानी करवाती
कितने प्यारे, कितने अच्छे
कितने भोले, कितने सच्चे
होते हैं ये, भाई-बहन के रिश्ते










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