26-Feb-2010

सुबह- सुबह बागों की सैर की बजाये ब्लॉगों की सैर करता हूँ आजकाल ,अपने ब्लॉग पर कुछ भी लिखे तो अरसा हो गया बस थोडा बहूत दूसरों की रचनाएँ और ब्लॉगों को जरूर पढ़ लेता हूँ... आज हिंदी युग्म पर महादेवी वर्मा जी की लिखी एक कविता पढ़ी ...

'जो तुम आ जाते एक बार'

जो तुम आ जाते एक बार,

कितनी करुणा कितने संदेश..
पथ में बिछ जाते बन पराग,
गाता प्राणों का तार तार..
अनुराग भरा उन्माद राग,

आँसू लेते वे पथ पखार...
जो तुम आ जाते एक बार,

हँस उठते पल में आर्द्र नयन..
धुल जाता होठों से विषाद,
छा जाता जीवन में बसंत...
लुट जाता चिर-संचित विराग,

आँखें देतीं सर्वस्व वार...
जो तुम आ जाते एक बार

1 comment:

सर्वेश दुबे said...

यु ही जज्बात जाया नही करते
दुसरो को कविता सुना कर मन को बहलाया नही करते
अभी तो बाकि है अपनों का काफिला
ब्लॉग पे लिख के लोगो को पढाया नही करते .
--सर्वेश दुबे