18-Apr-2010

आज मेरा जन्म-दिन है ... मन में विचार आया की मैं आज तो कुछ लिखूंगा ही लेकिन कैसे समय की किल्लत है और ऑफिस में व्यस्त दिनचर्या के बीच  बैठा मैं .. आज ठानी थी की अपने जन्म-दिवस को यूँ ही जाया नहीं जाने दूंगा तो लीजिये पंहुचा अपने ब्लॉग को अपने शब्दों से सींचने के लिए जिसे मैं पिछले काफी दिनों से दूसरों की रचनाओं का सब्जबाग दिखा दिखा कर ठगे जा रहा था.. लेकिन आस-पास ऐसा कुछ नया नहीं है जिसे शब्दों की रूप दे सकूँ .. आस-पास जो अच्छा लगे ऐसा भी कुछ नहीं वही पुरानी दास्ताँ लिखने का मन बिलकुल भी नहीं है और मेरे आस-पास जो है वह है ऑफिस और यहाँ के लोग, मेरा मैनेजर जिसे मुझसे बस काम चाहिए.. इन्हें मेरे जन्म-दिन पर मेरे कुछ लिखने और नहीं लिखने से कोई सरोकार नहीं है ... और मैं भी तो वही पुराना मैं हूँ कुछ नयापन तो है नहीं फिर मैं इनसे क्यूँ  शिकायत करूँ  मेरी कुर्शी वही कंप्यूटर वही, वही वर्क स्टेशन , वही व्यस्त कार्यक्रम ... और लोएक साल और बीत गया और मेरी उम्र एक साल और घट गयी, मुझे अपने ऑरकुट और फेसबुक स्क्रेप्स पर ढेरो शुभकामनाएं मिली मित्रो ने भी ढेरो बधाइयाँ दी शायद सुबह घर जाने पर (अपने किराए  के कमरों को ही घर कहता हूँ ) कुछ ख़ास दोस्तों को बुलाकर आज की शाम को थोडा खुशनुमा बना लूंइस जन्म-दिन को अपने घर पर सबके साथ मानाने की दिली ख्वाइश थी लेकिन ये हो ना सका....
कोशिश कर रहा हूँ पिछले एक वर्ष के जीवन को अपनी इन काव्य पंक्तियों के जरिये आपके सामने रखने की....

आज फिर एक साल बीत गया
आज मैं फिर थोड़ा बड़ा हो गया ....
बहूत चला थोड़ा गिरा, कभी कभी फिसला भी ...
कुछ दूर चलने के बाद कुछ नए और कुछ बिछड़े पुराने यार मिले
चंद मुलाकातों में रिश्ता गहरा भी हुआ ...
कुछ बिछड़े भी, कुछ साथ छोड़ गए
जो बिछड़े फिर उनका चेहरा कभी नजर नहीं आया
दिल भी दुखा आंसू भी छलके॥
खुशियाँ भी मिली अपार ....
कुछ आज भी वहीँ ठहरें हैं,
यादे बनी, अच्छी भी बुरी भी, कुछ कड़वी कुछ मीठी
शामें तनहा भी थी, गुलजार भी थे
वे दिन अच्छे थे, बुरे भी थे ...
कुछ यादें एक धुंधले से कोने में पीछे छूट गई






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