24-Jan-2011

"अस्तित्व"

तू भ्रम है या मेरी सच्चाई
नहीं जानता ,
हर पल साथ रहती है
ख़ामोशी में भी कुछ कहती है

महसूस करता हूँ तुझे
हर पल -हर क्षण ,
निष्पलक ये आँखें तलाशती हैं
तेरा अस्तित्व,
मृगतृष्णा की भाँती
क्यूँ तू मुझे आस-पास होने का आभास दिलाती है

तू कहती है
मैं उन्मुक्त हूँ
बादल की भाँती,
स्वन्त्रत हूँ
समुद्र की लहरों की तरह,
चंचल हूँ
अबोध बालक जैसे,
उन्मादित हूँ
यौवन की नित्यलीला सी
मुझे वरण करना संभव ना होगा

किन्तु मेरे लिए तू सच्चाई है
भ्रम नहीं,
कामना किया है
तुझे ही वरण करूँगा
तेरे इस रूप को अंगीकार करूँगा

पराजित हूँ
ह्रदय प्रेम के आगे,
तू मेरी ज्योत्स्ना बन
कर मुझे प्रज्वलित

तू मेरी विस्तृत व्याख्या है
मेरे अस्तित्व में ,
तू मुझे सम्पूर्ण कर

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