01-Jun-2011



"मेरे स्कूटर की पिछली सीट"

मेरे स्कूटर की पिछली सीट बहूत ही याद आती है,
उस पर बैठ कर कितना खुश होता था मैं 
आज उस स्कूटर के आगे की सीट मेरी हो गयी है
और पीछे की सीट हमेशा खाली रहती है
इसे भी मेरी कमी कहीं ना कहीं महसूस होती है ॥ 

इस स्कूटर को पापा चलते थे और मैं पीछे बैठा 
थोडा तेज चलो ना पापा के राग अलापता रहता था, 
बेटा इससे तेज नहीं चला सकता तुम गिर गए तो
गिरूंगा कैसे मैंने आपको कस के पकड़ा है छोडूंगा नहीं

पापा जाते-जाते विराशत में इसे मेरे लिए छोड़ गए
इसके साथ कितनी ही अच्छी और सुखद यादें जुडी हैं 
अनायास ही ये यादें कभी कभी यूँ फूट पड़ती हैं
पलकें नम हो जाती हैं और मैं रुंवासा हो जाता हूँ
पता ही नहीं चलता ॥ 

स्कूटर के पीछे बैठे
पापा की कितनी बातों को तो ध्यान ही नहीं देता था 
लेकिन वो हमेशा मुझे जिंदगी के
अच्छे बुरे पहलुओं से परिचय करवाते रहते थे
मैंने जिंदगी को हमेशा खिड़की के 
दूसरी तरफ से देखने की कोशिस की 
आज जिंदगी को खिड़की के तरफ से देखता हूँ 
तो पता हूँ की पापा की बातें कितने सही थे





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