23-Aug-2011

                          शत-शत नमन...



घर का सबसे मजबूत स्तम्भ अब नहीं रहा, इस स्तम्भ ने पूरे घर को यूँ  थाम  रखा था जैसे एक माँ अपने अबोध बच्चे को अपने गोद में रखती है और बच्चा भी अपने को सबसे ज्यादा महफूज इस गोद में ही पता है | १६ अगस्त को  घर पर बैठा लैपटॉप पर कुछ काम कर रहा था की अचानक गूगल टॉक पर हमारे एक पुराने मित्र सिद्धार्थ  का पिंग आया जिसे मैं पिछले काफी दिनों से संपर्क करने की कोशिश कर रहा था और वो जबाब नहीं दे पा रहा था |  खबर उससे  सुनी तो  सहसा विश्वास ना हो सका.. उसने बताया की उसके पापा अब हमारे बीच नहीं रहे.. उस समय  मेरे पास कोई शब्द नहीं थे  मुझे शब्दों में किसी का दुःख बांटना नहीं आता है, सो मूक श्रद्धांजलि ही सही | अंकल से पहली बार गोरखपुर में मुलाकात हुई थी कितने ही ससक्त और मजबूत इरादों के इंसान थे, उनके चेहरे पर हलकी झुर्रियां तो जरूर थी किन्तु चेहरे के तेज में जैसे वो छुप गया हो | सिद्धार्थ के परिवार  में लगभग सबको जानता हूँ, लगभग इसलिए कह रहा हूँ क्यूंकि यह एक संयुक्त  परिवार है और इस परिवार में कुल कितने सदस्य हैं ये शायद मुझे नहीं पता | सिद्धार्थ के घर (कुशीनगर) जाने का अवसर मुझे एक ही बार मिला और मुझे याद है की कितने प्रेम से  सभी ने मेरा स्वागत  किया था,और मेरा मन गदगद हो गया था | मुझे आपसी प्रेम औए सौहार्द्य  का एक सबक तो इस परिवार से ही मिला| उस घर से मेरा एक अजीब ही रिश्ता है, मैं उन लोगों के बहूत ही करीब होने का दंभ तो नहीं भर सकता किन्तु एक डोर है जो मुझे हमेशा उन लोगों से जोड़े रखती है| मुझे पता है सिद्धार्थ इस समय कितना दुखी होगा और साथ में घर के बाकी सदस्य भी | मैं इस पोस्ट के जरिये अंकल को अपनी श्रद्धांजलि देना चाहता  हूँ , कहना चाहता हूँ की आप एक बहूत ही अच्छे और सफल इंसान थे  और इस  समाज के लिए एक प्रेरणाश्रोत भी| हम सभी को आप पर बहूत ही गर्व है और मुझे पूरा विशवास है की  सिद्धार्थ भी आपके ही नक़्शे-कदम पर चलते हुए आपके सपने को जरुर साकार करेगा| मैं इस पोस्ट को लिखते   हुए बहूत ही भावुक हो गया हूँ और ज्यादा  शब्दों  को समेट नहीं पा रहा हूँ, अंकल को मेरे तरफ से भाव-भीनी श्रदांजली और  मैं आपको शत-शत नमन करता हूँ |


1 comment:

Abhi.... said...

u are always correct bhaiya....