25-Dec-2011

     कल रात कोई
     ख्वाब नहीं देखा
     क्यूँ की अब मैंने ख्वाबों
     को बुनना छोड़ दिया
     मैं जुलाहे से भी नहीं
     पूछता कोई तरकीब,
     क्यूंकि मैंने रिश्ते
     बुनना भी छोड़ दिया...

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