23-May-2012

मन करता है क्रोध करूं तुम पर
पर आता ही नहीं,

 उमड़ पड़ता है अथाह प्रेम
 तुम्हारी सुन्दर सलोनी छवि
कर जाती है स्पंदित मन को
जीवित हों उठता है अंतर्मन
सुकून दे जाता है कुछ पल को ,
तुम्हारे साथ होने की 

कल्पना मात्र ही रंग जाती है
मुझे प्यार के चटख गहरे रंग में
सब मीठा-मीठा सा लगता है
कर्णप्रिय मधुर संगीत 

बजने लगती है मन में ...
प्रेम के एहसासों से लबरेज मन
समंदर के गहराई में सुदूर कोने से
सीपियाँ बटोर लाता है
और फिर अचानक ही मन
काँप उठता है, शांत हों जाता है

डर जाता है इस एहसास
के खो जाने से |

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