25-Jun-2012

 

मेरी डायरी के उन दो पन्नों
को निहारता हूँ रोज
जिस पर लिख दिया है
तुमने कुछ शब्द मेरे लिए
तुम्हारी मोतियों की तरह
दिखने वाली लिखवाट
खुद को तुम्हारे करीब
होने का एहसास दिलाते हैं


कभी-कभी ग़ौर से हर शब्द को
पढ़ने की कोशिश करता हूँ
अब भी लगता है की
जैसे कुछ देर पहले ही
तुमने लिखा है मेरे लिए
तुम्हारे लम्स की गर्माहट
अब तक उस डायरी में मौजूद है ...!!!


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